यात्रा

केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री 2.0: गावं के समग्र विकास से बदल रही है प्रदेश की तस्वीर!

महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत गांवों में बसता है। और उनका ग्राम स्वराज का सपना था, गांवों के विकास के बगैर देश का विकास सम्भव नहीं है, इसी के दृष्टिगत वर्तमान सरकार अपनी पिछले कार्य काल से ही गांवों के विकास पर पूरा जोर दे रही है, इसमें ग्राम्य विकास विभाग की विशेष व महत्वपूर्ण भूमिका है। यही कारण देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने गांव के विकास के लिए मेरा गांव मेरी धरोहर की शुरुआत की। आज केंद्रीय प्रदेश सरकार गांव को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित कर स्मार्ट विलेज का निर्माण कर रहे हैं। गांव के विकास कार्य में क्रांति लाने का काम किया जा रहा है।

25 मार्च 2022 को उपमुख्यमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने के बादकेशव प्रसाद मौर्य ने सभी पहलुओं में गाँवों के विकास में गहरी रुचि दिखाई। इसलिए उन्होंने मिलकर “गाँव-गरीब” का कल्याण शब्द गढ़ा। इसीलिए केशव को प्रदेश सरकार ने ग्राम्य विकास विभाग का मंत्रालय आवंटित किया.

(केशव प्रसाद मौर्य: शपथ ग्रहण समारोह. 25 मार्च 2022)

केशव प्रसाद मौर्य का मानना है कि गांवों का विकास कर गरीबों के चेहरे पर मुस्कान लाना सरकार का मुख्य उद्देश्य है और गांव-गरीब की सेवा करने के लिए ही जनता ने हमारी पार्टी को दूसरी बार आशीर्वाद दिया है इसीलिए गरीब कल्याण एक महायज्ञ है जिसमें अपने विकास कार्यों तथा गरीब कल्याण योजनाओं की आहुति देनी है और ग्रामीण अंचलों का सर्वांगीण विकास करना है। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति हेतु केशव प्रसाद मौर्य ने 1 माह के भीतर विभागीय अधिकारियों के साथ विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक कर उल्लेखनीय निर्णय लिए जिसमें प्रत्येक ग्राम पंचायत में बारात घर राजधानी में राज्य मुख्यालय, खेल मैदान अंत्येष्टि स्थल इत्यादि के निर्माण की मंजूरी दी।

मनरेगा के तहत ₹17,456.70 करोड़ की लागत से  प्रदेश के 58,189 ग्राम पंचायतों में बारात घर के निर्माण के निर्णय लिए गए हैं। ये बारात घर में समस्त सुविधाओं से युक्त होगें जिससे गांवों के मांगलिक एवं वैवाहिक कार्यक्रमों के आयोजन सुगमता से हो सकेंगे। उत्तर प्रदेश के कुल 58189 ग्राम पंचायतों में 14174.84 करोड़ रु0 की लागत से अंत्येष्टि स्थल के निर्माण के निर्णय लिए गए हैं। ग्राम वासियों को दुःखद घटनाओं की स्थिति में अंतिम संस्कार से जुड़े क्रियाकर्मो को करने में आसानी होंगी। इसके निर्माण से गांव के वातावरण को प्रदूषण मुक्त रखने एवं पर्यावरण संरक्षण में काफी मदद मिलेगी। आजादी के 75 वर्ष बाद राजधानी लखनऊ में 145 करोड़ रुपये की लागत से ग्राम्य विकास विभाग का राज्य मुख्यालय के निर्माण के निर्णय लिया गया है।      इस मुख्यालय में आयुक्त ग्राम्य विकास कार्यालय, मनरेगा, एनआरएलएम, पीएमजीएसवाई, सोशल ऑडिट आदि के कार्यालय  एक स्थान पर स्थापित होंगे।

मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना को उत्तर प्रदेश में उड़ान मिली है। अमृत सरोवर के निर्माण में देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। उत्तर प्रदेश की सभी 58 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में, प्रति ग्राम पंचायत कम से कम दो अमृत सरोवरों (लगभग 1.20 लाख ) के विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

(अमृत सरोवर योजना)

अमृत सरोवर मिशन के तहत नए को खोदकर एवं पुराने सरोवरों को पुनर्जीवित कर बड़े तथा गहरे सरोवरों को बनाया गया है । इन सरोवरों में पानी इकट्ठा करने के लिए नाली बनाकर चलाया जाएगा, जिससे यह सरोवर वर्षा के पानी से लबालब भरे रहेंगे। अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है और इसके उपयोगिता को समझाया जा रहा है. तालाबों का सौंदर्यीकरण कर उनमें वैरिकेटिंग की गयी लाइट लगाकर उसमें रोशनी की समुचित व्यवस्था की गयी. कुसियों, बेंचों, व्यायाम व्यवस्था, दौड़ने के ट्रैक, आदि की व्यवस्था की गयी. घास काटकर उनके चारों तरफ छायादार वृक्ष लगाकर आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरोवर में नावका लगाकर बोटिंग की भी व्यवस्था हुई है।

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी अपने प्रथम कार्यकाल से ही ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु अनेक योजनाएं चलाएं जिसने ग्रामीण अंचलों में महिलाओं को स्वरोजगार तथा आर्थिक स्वावलंबी बनाने में निर्णायक भूमिका अदा की इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार 2017 से ही उन सभी केंद्र की योजनाओं को धरातल पर उतार कर महिलाओं  को रोजगार देकर उनको आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के निर्माण हेतु प्रेरित किया गया तथा उनकी ट्रेनिंग भी की गई आज उत्तर प्रदेश में लाखों की संख्या में स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं जिनके माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं और अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। इसी स्वयं सहायता समूह से महिलाओं को बैंक कोरेस्पोंडेंट सखी, विद्युत सखी जल सखी व कृषि सखी इत्यादि चयनित हो रही है और मासिक मानदेय से उनके जीवन में खुशहाली आई है। यही नहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अपने घर में निर्मित उत्पादों को फ्लिपकार्ट तथा अमेजन के माध्यम से देश-विदेश में भी पहुंचाने का काम कर रही हैं। ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायक के माध्यम से आयुष्मान कार्ड बनाए जाए जिससे भर्ती के समय अस्पताल में आयुष्मान कार्ड दिखाएं और नि:शुल्क उपचार का लाभ उठाएं।

केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग में अपने 6 महीने से कम के कार्यकाल में अनेक उल्लेखनीय निर्णय लिये। इसके साथ ही स्मार्ट गांव बनाने हेतु ग्राम्य विकास विभाग में कुछ और महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं:

कृषि आजीविका संवर्धन में भी स्वयं सहायता समूहों द्वारा योगदान दिया जा रहा है. कृषि आजीविका सखी को प्रशिक्षण देकर गौ-आधारित खेती (कीट प्रबंधन, जैविक खाद नीमास्त्र,  गोबर खाद, भू- नाडेप) इत्यादि गतिविधियाँ को बढ़ावा दिया का रहा है

विद्युत सखी, महिला ममेटों के ड्रेस कोड बनाए जाने का प्रस्ताव भी भेजने का फैसला लिया गया है.

सभी योजनाओं के परफारमेंस इंडिकेटर्स (के.पी.आई) बनायी जाये।

विभाग के सभी भवनों को एक यूनिक कलर से पेन्ट कराकर एकरूपता लाया जाए।

सभी भवनों पर प्रेरक स्लोगन लिखाए जायें,

विभाग का लोगो बनाया जाए।

प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) के सभी लाभार्थियों के घरों पर एक्रेलिक शीट पर प्लेट लगाए जाएं। स्वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित उत्पादों के विपणन के लिए उपयुक्त बाजार उपलब्ध कराये जाए।

ग्रामीण अंचलों में सड़कों की स्थिति एवं गुणवत्ता को सुधारने के लिए केशव प्रसाद मौर्य ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया क्योंकि पिछले कार्यकाल में उन्होंने पूरे प्रदेश में सड़कों के निर्माण में उल्लेखनीय कार्य किया था एवं अपने अभूतपूर्व निर्णय उसे प्रदेश की सड़क व्यवस्था को दुरुस्त किया था अपने इसी अनुभव एवं कार्यकुशलता का प्रयोग करते हुए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में गांव की सड़कों को और व्यवस्थित करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है!

25 हजार किमी0 नई सड़कों को बनाये जाने का रोडमैप तैयार किया गया है. पीएमजीएसवाई-3 के अन्तर्गत सड़कों के चयन में गाँव-गरीब, विद्यालयों एवं चिकित्सालयों का विशेष ध्यान रखा गया है। पीएमजीएसवाई की सड़कों के निर्माण में एफडीआर तकनीकी लागू करने के संबंध में अंतर्राज्यीय कार्यशाला का भी आयोजन किया गया. पीएमजीएसवाई की सड़कों के उच्चीकरण में एफडीआर तकनीक अपनाए जाने से 3 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी।

इस तकनीक  के अपनाने से अपेक्षा कम लागत में अच्छी ,टिकाऊ व मजबूत सड़कें बनाई जा रही हैं, इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी‌ यह तकनीक बहुत ही अनुकूल साबित हो रही है, यही नहीं इस तकनीक के अपनाने से कार्बन उत्सर्जन में भी बहुत कमी हो रही है।

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