हमारे आदर्श

हमारे आदर्श संघ एवं भाजपा के शिखर पुरुष

1889-1940

इस समाज को जागृत एवं सुसंघटित करना ही राष्ट्र का जागरण एवं संघटन हैण् यही राष्ट्र कार्य है ।

डाॅ. केशव बलिराम हेडगेवार

1906-1963

भारत - भूमि इतनी पावन है कि अखिल विश्व में दिखाई देनेवाला सत तत्व यहीं अनुभूत किया जाता है अन्यत्र नहीं ।

श्री माधव सदाषिव गोलवलकर

1926-2015

धर्म जागरण एवं कर्मनिष्ठा का सबसे बडा स्त्रोत श्रीमद्भगवतगीता ग्रन्थ है। मैं अपने जीवनकाल के सत्कर्मों की प्रेरणा स्त्रोत इसे ही मानता हूँ।

श्री अशोक सिंघल

1901-1953

एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे मेरे पुत्र की मृत्यु भारत माता के पुत्र की मृत्यु है अपने पुत्र की असामयिक मृत्यु का समाचार सुनने के पश्चात डॉ मुखर्जी की माता योगमाया देबी ने कहा था ।

डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी

1916-1968

आर्थिक योजनाओं तथा आर्थिक प्रगति का माप समाज के उपर की सीढी पर पहुंचे हुए व्यक्ति नहीं, बल्कि सबसे नीचे के स्तर पर विद्यमान व्यक्ति से होगा ।

श्री पं0 दीन दयाल उपाध्याय

1924-2018

देश एक मंदिर है, हम पुजारी हैं । राष्ट्रदेव की पूजा में हमें अपने को समर्पित कर देना चाहिए ।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी
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