• प्रारंभिक जीवन: बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बचपन

    केशव प्रसाद मौर्य का जन्म 7 मई 1969 को कौशाम्बी जनपद के सिराथू गांव में हुआ। 1970 का दशक भारतीय राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें तीन बहुत बड़ी राजनीतिक घटनायें घटित हुई, जिसने भारतीय राजनीति की दशा एवं दिशा को बदल दिया- प्रथम: 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण; द्वितीय: प्रिवीपर्स को समाप्त करना; तृतीय: विश्व के मानचित्र में एक नये देश बांग्लादेश का उदय होना प्रमुख था |

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  • समर्पण, सहयोग तथा नेतृत्व की अद्वितीय क्षमता : केशव प्रसाद मौर्य

    1989 से भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हुई । ये दौर गठबंधन सरकारों का था। दूसरे शब्दों में 1990 के दशक में भारतीय राजनीति में दो बड़े परिवर्तन आये-प्रथम, केंद्र में गठबंधन सरकारों का गठन एवं द्वितीय, अयोध्या में राममंदिर निर्माण के मुद्दे को गति मिलना। इन दोनों मुददों ने भारतीय राजनीति की दशा एवं दिशा को परिवर्तित कर दिया जिसका प्रभाव केशव पर व्यापक रूप से पड़ा ।

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  • केशव का सक्रिय राजनीति में प्रवेश
    माननीय अशोक सिंघल जी के आदेश पर केशव प्रसाद का सक्रिय राजनीति में प्रवेश

    केशव जी का व्यक्तित्व हमेशा से कर्तव्यपूर्ण और संघर्षवान रहा | 2000 के दशक में केशव जी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया । उनके गुरु माननीय अशोक सिंघल जी के आदेश पर ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में अपना कदम रखा । सन 2002 में जब माननीय श्री राजनाथ सिंह जी की सरकार उत्तर प्रदेश में आयी और वहीं केंद्र में अटल बिहारी बाजपेई जी की सरकार थी इस दौर में उन्होंने पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्त्ता के रूप में जी-जान लगा दी थी ।

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  • विधायक से उपमुख्यमंत्री बनने तक का सफर

    वर्ष 2012 में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इनके संगठन के प्रति कार्यों एवं समर्पण को देखते हुए सिराथू विधान सभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया । सैनी में आपके नेतृत्व में पहली बार ऐसी सभा आयोजित हुई कि दुबारा इस मैदान में इतनी बड़ी कोई जनसभा नही हो सकी । विराट जन सैलाब ने सब को देखा बार-बार, केशव भईया अबकी बार का नारा बुलन्द किया । परिणमतः केशव प्रसाद मौर्य 6 मार्च 2012 को सिराथू विधानसभा से भारी मतों से विधायक निर्वाचित हुए ।

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