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जल संरक्षण:

1. हमें जल संरक्षण क्यों करना चाहिये?

संसार के प्रत्येक प्राणी के जीवन का आधार जल है। शायद ही ऐसा कोई प्राणी हो जिसे जल की आवश्यकता न हो। जल हमें समुद्र, नदियों, तालाबों, झीलों, वर्षा एवं भूजल के माध्यम से प्राप्त होता है। अल्प वर्षा, मरूस्थल, जैसी विषमताएँ प्रकृति में विद्यमान हैं. मानव अपने स्वास्थ्य, सुविधा, दिखावा व विलासिता को दिखाने के लिये अमूल्य जल की बर्बादी करने से नहीं चूकता है।मानव यदि अपनी आदतों को बदल लें तो 80 प्रतिशत से भी अधिक पानी की बचत हो सकती है। बूंद बूंद की बचत से एक बड़ी बचत हो सकती है। इस प्रकार पानी की बचत ही जल संरक्षण है।

2. आखिर जल का स्वच्छ होना क्यों आवश्यक है और यह मूल्यवान क्यों है?

कई लाख लोग प्रतिवर्ष जल के दूषित होने के कारण बीमारियों से मर रहे हैं। हर 15 सेकंड में एक बच्चाजलजनित रोग से मर रहा है। मनुष्य में होने वाली बीमारियों में साठ प्रतिशत हिस्सा जलसे उत्पन्न बीमारियों का होता है। ये बीमारियाँ जाने-अनजाने अपेय, अशुद्धजलपीने से होती हैं। अतः यदि हमजलको शुद्ध रखते हैं एवं शुद्धजलही ग्रहण करते हैं तो मानव शरीर की आधी बीमारियों का कष्ट स्वतः समाप्त हो जाता है।

3. जल संरक्षण कैसे करें ? सबसे पहले तो हम सभी को मिल कर संकल्प करें कि आज से हम पानी को बर्बाद नहीं करेंगे और जितना हो सके उतना जल संरक्षण करेंगे। हम चाहें तो बारिश के कपडे धोने, बगीचे में पानी देने, और नहाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ हम निम्न उपाय कर सकते है:

· हमें स्वच्छ पीने के पानी को शौचालय और नहाने में बर्बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने के कारन धीरे-धीरे जल स्थर कम होते जा रहा है।

· अगर हम नहाते समय शावर की जगह नहाने के लिए बाल्टी का उपयोग करें तो हम 100-200 लीटर पानी प्रतिदिन बचा सकते हैं।

· नल के इस्तेमाल के बाद उसे टाइट से बंद करें क्योंकि पानी गिरते रहने से बहुत बर्बाद हो जाता है और हमें पता भी नहीं चलता। एक टपकते नल से प्रति सेकेंड एक बूँद बर्बाद होने से एक माह में 760 लीटर पानी व्यर्थ में ही बह जाता है।

· हमें अपने गाँव, मोहल्ले और शहर में जल संरक्षण पर नारों के साथ लोगों को पानी को बचाने के फायदों के बारे में बताना चाहिए।

· ज्यादातर पेड़-पौधे बारिश के महीने में लगायें ताकि पौधों को प्राकृतिक रूप से पानी मिल सके।

· हमें हाँथ, फल सब्जियों को दोने के लिए मग में पानी लेना चाहिए क्योंकि नल से दोने पर बहुत पानी बर्बाद हो जाता है। प्रेशर से कार धोने, जल की धार से सब्जियाँ धोने में पानी बर्बाद होता है। टॉयलेट और यूरिनल में लोग काफी पानी बर्बाद करते हैं। जरूरत के अनुसार ही पानी को फ्लश करें.

· सार्वजनिक नलों से बहता हुआ पानी पर्याप्त मात्रा में बर्बाद होता है। इसलिए कही भी सार्वजनिक नलों से बहता हुआ पानी तो बंद करें. ड्रिप सिंचाई प्रणाली से कम पानी में अधिक सिंचाई हो जाती है। इससे लगभग आधा पानी बच जाता है।

· कम रिसाव वाले मटकों का उपयोग करने से जल की बचत होती है।

· पर्याप्त कपड़े होने पर ही वाशिंग मशीन का उपयोग करें।

· बर्फ के टुकड़ों को किसी पौधे या लाॅन में डाल दें।

· शेव, ब्रुश, मुँह आदि धोते समय लगातार नल न चलाएँ।

· मेहमानों को आधा गिलास पानी दें बाद में माँगने पर ही और दें।

4. जल संरक्षण के लिये निगरानी तंत्र कौन-कौन से है?

राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी के लिये विशेष सचिवों की अध्यक्षता में राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया है। जो कार्यक्रम की देखरेख करते हैं। इसी प्रकार राज्य स्तर पर भी राज्य निगरानी समिति बनाई गई है।

5. जल संरक्षण के जागरूकता के लिए सरकार क्या प्रयास कर रही है?

देश में जल संरक्षण एवं प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने, नदियों के बहाव की निगरानी करने और जल संरक्षण एवं प्रदूषण निवारण आदि के लिए सरकार ने महत्वकांक्षी ‘जल क्रांति अभियान’ नामक एकीकृत योजना को आगे बढ़ाते हुए अब तक 1001 ‘जल ग्राम’ का चयन किया है। 6. व्यक्तिगत रूप से जल क्रांति से आप क्या समझते है?

जल क्रांति अभियान 2015-16 में शुरू किया गया। इस अभियान के अन्तर्गत समाज के विभिन्न संगठनों और समुदायों के बीच समग्र एवं सामूहिक भागीदारी के माध्यम से जल संवर्धन एवं प्रबंधन के मुद्दे को एक जन आंदोलन का रूप देना है। जल क्रांति अभियान 5 जून 2015 को सम्पूर्ण देश में लागू किया गया। किन्तु इस अभियानहमको हर गाँव तक ले जाने की जरूरत और इसके महत्व को समझाना होगा.

7. क्या आपको लगता है कि वर्षाजल संग्रहणसे लाभ हो सकते है?

· वर्षा जल जीवाणुओं रहित, खनिज पदार्थ मुक्त तथा हल्का होता है।यह बाढ़ जैसी आपदा को कम करेगा।

· भूमि जल की गुणवत्ता को, विशेष तौर पर जिसमें फ्लोराइड तथा नाइट्रेट हो, द्रवीकरण के द्वारा सुधारता है।सीवेज तथा गन्दे पानी में उत्पन्न जीवाणु अन्य अशुद्धियों को समाप्त/कम करता है जिससे कि जल पुन: उपयोगी बनता है।

· वर्षा जल का संचयन जरूरत के स्थान पर किया जा सकता है तथा जरूरत के समय इसका प्रयोग कर सकते है।वर्षा जल के संचयन के लिए यह प्रणाली काफी सरल, सस्ती एवं पर्यावरण के अनुकूल है।

· शहरी क्षेत्रों में जहाँ पर शहरी क्रियाकलापों में वृद्धि के कारण भूमि जल के प्राकृतिक पुनर्भरण मे तेजी से कमी आई है तथा कृत्रिम पुनर्भरण उपायों को क्रियान्वित करने के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है, भूमि जल भण्डारण का यह एक उचित विकल्प है।

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